एससीएसटी अत्याचार अधिनियम के नियमों की उ ड़ रही हैं धज्जियां

सागर सूरज / मोतिहारी

आरक्षी उपाधीक्षक मुरली मनोहर मांझी के द्वारा अनुसूचित जाति-अनुसूचित जन जाति अत्याचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत दायर किए गये एक मुकदमे के पर्यवेक्षण टिप्पणी में कई अनियमितताएं सामने आयी है।
पूर्वी चंपारण के पुलिस अधीक्षक ने आरोप के बाद घटना स्थल पर पहुँच कर खुद पूरे मामले की जांच की तथा गवाहों से पूछताछ किया, साथ ही इस मामले से संबन्धित सभी पुलिस अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई।
मामला अनुसूचित जाति- अनुसूचित जन जाति अत्याचार से जुड़े एक मामले को किसी प्रभाव में आकर सत्य करार देने से सम्बंधित है, जिसमें आरक्षी उपाधीक्षक मुरली मनोहर मांझी पर आरोप है कि उन्होंने हत्या के एक मामले के बाद मुकदमे से बचने के लिए किए गये एक मुकदमे को न केवल सत्य करार दे दिया बल्कि अभियुक्तों को 41 (क) का लाभ देते हुये जमानत भी दिलवाने में मदद कर डाली।
पूछने पर आरक्षी उपाधीक्षक मुरली मनोहर मांझी इस बारे में कुछ भी बोलने से मना कर दिये, वहीं बार-बार कॉल करने के बाद भी आरक्षी अधीक्षक उपेंद्र कुमार शर्मा इस मामले में कुछ भी बोलने को उपलब्ध नहीं हो सके। मुफ़्फ़सिल थाने के थाना प्रभारी मनीष कुमार ने बताया कि मामले में पुलिस अधीक्षक को सदर आरक्षी उपाधीक्षक का अनुसंधान कमजोर लगा, यही कारण है कि उन्होंने खुद मामले की जांच की एवं कई बिन्दुओं पर साक्षियों से सवाल पूछे एवं अधिकारियों को निर्देश दिये।
बताया गया कि मामला मोतिहारी के अनुसूचित जाति-अनुसूचित जन-जाति थाना मे दर्ज एक मुकदमा से जुड़ा है। मुकदमे में मुफ़्फ़सिल थाना अंतर्गत स्थित रायसिंहा गाँव के धूमन पासवान ने अपने ही गाँव के मुन्ना यादव सहित अन्य पर मजदूरी करने के दरम्यान जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने एवं मार-पीट करने का आरोप लगाते हुये एक मुकदमा दर्ज करा दिया।
पुलिस ने बताया कि मुन्ना यादव को अपने ही पट्टीदार से हत्या के मामले में मुकदमा चल रहा था। इस मामले में दोनों ही पक्षों दवारा एक दूसरे पर मुकदमा किया गया था। मुकदमे में मुन्ना पुलिस द्वारा बरी कर दिया गया था, क्योंकि उसे झुठा फसाया गया था। मुन्ना द्वारा मुकदमे को समझौता हेतु दबाब बनाने की नीयत से एक मुकदमा धूमन पासवान पिता भिखारी पासवान से करवा दिया जिसे न केवल सत्य करार दिया गया बल्कि 41(क) का लाभ देते हुये मुन्ना को जमानत भी दे दी गयी थी।
जमानत मिलने के बाद झारखंड मे स्थापित मुन्ना का एक रिश्तेदार पुलिस अधिकारी ने जिले के पुलिस अधीक्षक उपेंद्र कुमार शर्मा से मिलकर निर्दोष होने एवं मुकदमा को झूठा होने के सारे सबूत प्रस्तुत किए। उसके बाद आरक्षी अधीक्षक ने खुद ही घटनास्थल पर पहुँच कर मामले की गहराई से जांच की।
सनद रहे कि पूर्व में सदर आरक्षी उपाधीक्षक मुरली मनोहर मांझी के कार्यालय के ऊपर कई लिखित एवं मौखिक आरोप पुलिस अधीक्षक उपेंद्र शर्मा के समक्ष लगाए गए। कुछ को अपर पुलिस अधीक्षक शैशव यादव को जाँच के लिए आदेश दिया गया तो कुछ को सीधे निगरानी के पास जाने के सलाह भी दे डाली गई।
अपर पुलिस अधीक्षक शैशव यादव ने कहा कि एक मामला तुरकौलिया थाने से जुड़ा है तो दूसरा मुफ़्फ़सिल थाने का है। दोनों ही मामले मे जाँच कर ली गयी है एवं एक मामले मे आरक्षी उपाधिक्षक कार्यालय के एक कर्मचारी पर प्रोसीडिंग चलायी जा रही है तो दूसरे मामले मे साक्ष्य के अभाव मे कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
राष्ट्रीय दलित मानवाधिकार के संयोजक राजू बैठा ने आरोप लगाया है कि अनुसूचित जाति-अनुसूचित जन-जाति अत्याचार अधिनियम के नियमों की धज्जियाँ उड़ती रही है। इस अधिनियम के अवहेलना के लेकर बैठा ने डीएसपी मांझी के विरुद्ध कई आवेदन दिए हैं जिसमें जांच लंबित है।

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